मंगलवार, नवंबर 24, 2009

अभी क्यों आयी रिपोर्ट

लिब्राहन की रिपोर्ट इस वक्त क्योँ जारी की गए यह समझ से परे है। वोह भी तब जबकि आज हमारा देश आपने पुराने जख्मों को कुरादना नही चाहता। इस संसदिये सत्र में बजाई मधु कोड़ा या स्पेक्ट्रुम घोटाला पर चर्चा हो तो ऐसा नही हुआ, मुझे ऐसा लगता है सरकार ने इनसे अपना पीछा हटाने के लिये इस रिपोर्ट को लीक करवाया है। आज जब हम इतनी तरकी कर रहें हैं तो आज का युवा इन् धार्मिक उन्माद में ख़ुद को देखना नही चाहता।
बेहरहाल इस रिपोर्ट ने भाजपा को जर्रोर नयी संजीवनी दे डाली है, नकली पटेल लाल kरिशन आडवानी जो बिल्कुल ही हाशिये पर चले गए थे उनेहे एक नयी ज़मीन प्रदानकी है। अब वोह फिर से गरजने लगे हैं.

गुरुवार, नवंबर 19, 2009

कोम्पुटर पर अपनी आंख का रखो ख्याल

सूचना प्रोद्योगिकी के इस युग में कम्प्युटर तथा सूचना तकनीकी से जुड़े अधिकतर लोग लगातार कई घंटों तक कम्युटर पर कार्य करते रहते हैं, bahut एसे भी हैं जो शौकिया या व्यसनी तौर पर ही सही घंटों कम्प्युटर के सामने बैठे रहते हैं और बड़ी चाव से मॉनिटर को निहारते रहते हैं| सही तौर पर कहें तो हम कम्युटर के इतने आदी हो गए हैं की एक बार कम्युटर के सामने बैठ गए तो फिर वहां से हटने का ख्याल ही नहीं आता और घंटो आँखे गड़ाए बस मोनिटर को निहारते हुए कार्य करते रहते हैं| यह हमारी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा बन गया है, आज हम कम्युटर पर कार्य किये बिना दिन नहीं बिता सकते| कुछ कुछ कार्य लगा ही रहता है, यदि कोई विशेष कार्य नहीं तो बस मौज मस्ती ही सही और हम जुट जाते हैं इन्टरनेट पर मटरगस्ती करने के लिए और जो एक बार इन्टरनेट की रह पकडी तो फिर अंत कहाँ!!! कुछ और नहीं तो कम्युटर पर विडियो गेम ही खेलने में मसगुल हो जाते हैं.... जो लोग कम्प्युटर के कार्य से जुड़े हैं जैसे की सॉफ्टवेर प्रोग्रामर तथा बीपीओ एवं कॉलसेंटर में कार्य करने वाले लोग तो १२-१५ घंटे कम्युटर मोनिटर से आँखे दो-चार करते रहते हैं...

लगातार कई घंटों तक कम्युटर को देखने से हमारी आँखों पर इसका बेहद ही बुरा प्रभाव पड़ता है जिसके परिणाम स्वरूप हमारी आँखे कमजोर हो सकती हैं जिससे हमारी आँखों पर नंबर वाले चश्में लगाना अनिवार्य हो जाता है| लगातार एक-टक मॉनिटर को निहारते रहने से हमारी आँखों को जरूरी विश्राम नहीं मिल पता तथा हमारी आँखों की पुतली सुखाने लगती है जो हमारी आँखों के स्वास्थ्य के लिए बिल्कुल भी अच्छा नहीं है| बस हमें कम्युटर पर कार्य करते समय नियमित रूप से थोडी थोडी अंतराल पर आँखों के सुरक्षा के लिए कुछ उपाय करते रहने चाहिए जो हमारी आँखों को रहत पहुँचाने के आलावा उनके स्वास्थ्य रहने में भी काफी कारगर सिद्ध होता है| कुछ उपाय जो हमारी आँखों को कमजोर पड़ने से बचायेंगे निम्नलिखित हैं, इनका पालन करके bahut हद तक आँखों को सुरक्षित रखा जा सकता है:

क्या करें:

1. कभी भी मॉनिटर को लगातार घूर-घूर कर नहीं देखना चाहिए, समय समय पर अपनी पलकों को झपकते रहना चाहिए|

2. हर १५-२० मिनट पर मॉनिटर की तरफ से अपनी नजर हटा कर कमसे कम - मिनट के लिए किसी २०-२५ फीट दूर जगह पर ध्यान ले जाएँ और उस दौरान अपने गरदन को दायें-बाएँ घुमाते रहे|

3. हर ४०-५० मिनट पर अपने हाथों की हथेली को आपस में अच्छी तरह से रगड़ कर आँखों को हथेली से करीब मिनट तक ढके रहे इससे आँखों को काफी राहत मिलती है|

4. हर घंटे-दो-घंटे में अपने चहरे एवं आँखों पर पानी के छींटे मारें इससे आपको सिर्फ ताजगी मिलेगी अपितु आपकी आँखों को भी राहत महसूस होगा और वे तरोताजा रहेंगे|

5. हर दो-घंटे के उपरांत कम से कम मिनट के लिए कहीं टहलने के लिए निकल जाये इससे आप की आँखों को कुछ समय के लिए राहत मिला जायेगा| साथ ही साथ ऐसा करनें से आपके कमर, कंधे एवं रीढ़ की हड्डी का भी कसरत हो जायेगा|

6. कम्प्युटर पर कार्य करते वक्त हो सके तो हर संभव एंटीग्लेअर चश्मा जरूर ही पहनें, इससे मॉनिटर से निकलने वाली विकिरणों से हमारे आँखों की सुरक्षा होती है|

7. अपनें भोजन में एसे फल एवं सब्जिओं का प्रयोग करे जिससे आँखों को पोषण मिल सके, जैसे की रोज कम से कम एक गाजर जरुर खाएं|

8. हफ्ते में एक बार आँखों में सुरमा या काजल लगायें इससे आँखों को काफी राहत मिलाता है| आप आँखों में शुद्ध शहद या नेत्रप्रभा भी लगा सकते हैं| आँखों में कोई भी दवा लगाते समय सफाई का ध्यान देना बेहद आवश्यक है|

9. आँखों में लगातार ज्यादा दर्द, जलन या चुभन हो तो तुंरत ही नेत्र विशेषज्ञ से मिलें| वैसे भी समय समय पर आँखों की जांच करवाते रहना चाहिए|

क्या करें:

1. आँखों में दर्द होने पर या आँखों में कुछ गिर जाने पर कभी भी आँखों को जोर जोर से रगडें, बल्कि अपनी पलकों को तेजी से झपकें इससे आँखों में अंशु जायेंगे जो आँखों के लिए अमृत से कम नहीं हैं, आँशु आने से आँखों में पड़ी गन्दगी भी आँशु के साथ बह कर निकल जायेगी|

2. घुर-घुर कर या टक- टकी लगाकर एवं लम्बे समय तक मॉनिटर को देखें|

3. बिना साफ़ किये हाथों या कपडे से आँखों को पोछें|

4. बिना विशेषज्ञ के परामर्श के आँखों में कोई भी दवा या आई-ड्राप डालें|

5. आँखों को धुल-मिटटी के संपर्क में आने से बचाएं|

मंगलवार, सितंबर 29, 2009

पानी की बर्बादी

आप अक्सर यह सोचते है कि आज मैंने काफी पानी की बचत कर ली है तो आप किसी खुशफहमी में न रहे, क्योंकि इस तरह आप पानी नही बचा रहें हैं। तो आपको हकीकत से रूबरू कर्बता हूँ। आंकडों पर नज़र डालें तो ब्रेड की एक पीस के उत्पादन पर पर ४० लीटर पानी खर्च होता है.

छुट्टी का सदुपयोग कर रहा हूँ

हैदराबाद में शूटिंग करते वक़्त मेरी पीठ में चोट लग गई थी। उसके बाद मैं बिस्तर पर पड़ा रहा। चोट से उबर ही रहा था कि मुझे ‘जेल’ फ़िल्म की डबिंग करनी पड़ी। फिर ‘एसिड फ़ैक्ट्री’ के प्रचार-प्रसार में जुट जाना पड़ा। और उसके बाद प्रकाश झा की शूटिग के लिए भोपाल आना हुआ है। काफी भागमभाग रही है। पीठ को पूरा आराम दे नहीं पाया। लेकिन, अब पीठ ख़ुद ठीक हो रही है।

आजकल खाली समय में टीवी लगाकर देखता रहता हूँ कि 'एसिड फ़ैक्ट्री' के प्रोमो कब आएंगे। लगातार एसिड फैक्ट्री का प्रचार धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है। और अच्छा ये लग रहा है कि एसिड फ़ैक्ट्री के निर्माता और वितरक दोनों ही उसके सही प्रदर्शन को लेकर सजग हैं। यहाँ भोपाल में दो दिन की छुट्टी मिली मुझे, तो मैं भोजपुर चला गया शिवलिंग के दर्शन करने। वहाँ से निकलकर भीम बेटिका गया, जो विश्व धरोहर है। वहाँ पहुँचते ही एक गाइड को अपने साथ लिया। ताकि वो हमें गुफाओं और गुफाओ पर बने शैल-चित्रों के बारे में विस्तृत जानकारी दे सके।

अच्छा ये लगा कि इस धरोहर को बहुत ही सुरक्षित ढंग से रखा गया है। काफ़ी साफ़-सफ़ाई रखी गई है। गाइड के बोलने के अंदाज़ को देखकर मैं काफ़ी अचंभित हुआ और मन-ही-मन में उसके अंदाज़ की नक़ल करना शुरु कर दिया। कभी ऐसी कोई भूमिका मिले तो उस गाइड की नक़ल ज़रुर करुंगा। मेरी यात्रा काफ़ी जानकारी भरी रही और गाइड के कारण काफ़ी मनोरंजक भी।

मुझे पता है कि मैं अपना ब्लॉग नियमित नहीं लिख पा रहा हूँ। थोड़ा गैप आ जाता है। लेकिन अब इस अंतराल को कम करने की पूरी कोशिश होगी। अब हर हफ़्ते आपसे मुख़ातिब होऊंगा और उस हफ़्ते की पूरी गतिविधि के बारे में आपसे बातचीत किया करुंगा।

लेकिन,अभी मुझे एक स्क्रिप्ट पढ़कर ख़त्म करनी है,यही मौक़ा है जब मुझे छुट्टी मिली है तो उसका उपयोग करुँ। और ब्लॉग का उपयोग करते हुए मैं सिर्फ़ ये कहूंगा कि एसिड फ़ैक्ट्री के बारे में जितनी जानकारी ले सकते हैं,ले लें। नेट पऱ। फ़िल्म मैंने देखी है और फ़िल्म काफ़ी अच्छी है। लेकिन उसके बारे में बातचीत उसके प्रदर्शन के वक़्त करुंगा। अभी के लिए इतना ही।

आपका और सिर्फ़ आपका

मनोज बाजपेयी
साभार manojbajpayee.itzmyblog.com/

रविवार, सितंबर 27, 2009

यह मेरा सड़ा आचार

अरे यार यह सड़ा आचार क्या है चलिये मैं बत्ताता हूँ चूँकि पत्रकार हूँ तो बात करता हूँ संपादक की । हर आदमी संपादक होता है और चोट्टे पतरकारों की नज़र में वोः सड़ा आचार होता है । मजे की बात यह है की संपादक की नज़र में यह तुचे पत्रकार सड़ा आचार होता है इसके ठीक विपरीत ये लेखक संपादक की नजरों में सड़े अचार होते हैं जो सड़े अचार की माफ़िक घोर अपठनीय-अप्रकाशनीय रचनाओं पर रचनाएँ लिख मारते हैं.

यहां खाकी बदनाम :- नशा तस्करों से मोटी रकम वसूलने वाले सहायक थानेदार और सिपाही नामजद, दोनों फरार

यहां खाकी बदनाम :- नशा तस्करों से मोटी रकम वसूलने वाले सहायक थानेदार और सिपाही नामजद, दोनों फरार एसटीएफ की कार्रवाई में आरोपियों से...